प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम, आज प्रवाह में हम बात करेंगे, प्रतिबद्धताओं पर, हम अपनी किसी बात पर कितने दृढ़ संकल्पित है, प्रतिबद्ध है, निरंतर सक्रिय है, जीवन में हमें
परिणाम भी वैसे ही प्राप्त होते हैं।
हम जितनी अधिक प्रतिबद्धता से परिवार व समाज में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे, उतने ही शानदार परिणाम हमें मिलेंगे, हमें
जीवन में हमारी हर भूमिका को गहराई से रेखांकित करने की जरूरत है, हम क्या कर रहे हैं? क्यों कर रहे हैं? यह सवाल अपने आप से अवश्य पूछे, क्योंकि उत्तर भी हमें भीतर से ही मिलेगा, जितना हम चिंतन करेंगे, उतना ही हम अपने आप को परिपक्व करेंगे, हमें अपने व्यक्तित्व की खूबियां व खामियां का पता चलेगा, और यह प्रक्रिया सतत जीवन में निरंतर चलती रहेगी , तो परिणाम बेहतर से बेहतर होते रहेंगे, प्रतिबद्धता से मेरा आशय
निरंतरता से ही है, क्योंकि जब हम किसी भी कार्य को निरंतर करते हैं, ईमानदारी पूर्वक
हम समय व श्रम प्रदान करते हैं, तो परिणाम निश्चित ही एक सुखद रूप में हमें मिलेंगे।
हमारा जीवन केवल हमारा नहीं, इससे हमारा परिवार व समाज भी जुड़ा है, और अनिवार्य रूप से हमारी कोई भी गतिविधि
हमारे समाज व परिवार में प्रभाव डालती ही है, इसलिए यह आवश्यक हो जाता है, कि हम अपने मूल्यों व हमारी सामाजिक संरचना के प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध होकर अपनी भूमिका का निर्वहन करें, सबसे पहले बदलाव हमें स्वयं में करना होगा, उसके बाद हम किसी और से उम्मीद कर सकते हैं, वैसे भी हर
व्यक्ति की चौकस निगाहें एक -दूसरे पर होती है, अगर हम कोई काम प्रतिबद्धता पूर्वक व पूर्ण निष्ठा से करते हैं, तो उसके अनुकूल परिणाम निश्चित ही हमें प्राप्त होंगे, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है, पर यह जरूरी है,
हम अपनी प्राथमिकता, आवश्यकता और समाज के प्रति हमारी भूमिका का पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी व प्रतिबद्धता पूर्वक निर्वहन करें, फिर आप देखेंगे , धीरे-धीरे आपकी विचारधारा से जुड़े लोग स्वयं ही आप से जुड़ने लगेंगे, और एक श्रेष्ठ व परिणाम मूलक
प्रक्रिया का निर्माण अपने आप होने लगेगा,
जो किसी भी समाज के लिए आवश्यक भी है,
आपकी निरंतरता दूसरों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी, और स्वमेव एक सुंदर समाज का निर्माण होता जायेगा, हमें बस अपनी भूमिका का निर्माण उचित तरीके से निभाने की जरूरत है, बाकी सब धीरे-धीरे अपने -आप होने लगेगा।
विशेष:- जो भी मूल्य समाज के लिए जरूरी है, उनके लिए सबसे पहले प्रतिबद्ध हमें होना पड़ेगा, किसी और को उसके लिए बताने से पूर्व हमें उस भूमिका में उतरना होगा, तभी परिणाम हमें आशा जनक प्राप्त होंगे, अगर हम प्रतिबद्धता पूर्वक अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन करते हैं, तो परिणाम निश्चित ही श्रेष्ठ होंगे।
आपका अपना
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद