प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, तमाशबीन शब्द पर, हमारा समाज कई व्यक्तियों से मिलकर बनता है, विभिन्न प्रकार के विचारधाराओं के लोग इसमें होते हैं, उन्हीं में से एक होते हैं, तमाशबीन , ये वे लोग होते हैं,
जिन्हें दूसरों की जिंदगी में क्या चल रहा है,
यह देखने का बड़ा शौक होता है, यानी कि तमाशा देखने में बड़ा मजा आता है, यह किसी भी समस्या का हल तो नहीं निकाल सकते, पर उस समस्या का तमाशा जरूर बना सकते
हैं, क्योंकि वह इनकी आदत बन चुकी होती है।
इस प्रवृत्ति के लोग समस्या का हल कभी नहीं ढूंढते, उन्हें तो उस समस्या का
बस तमाशा बनाना होता है, क्योंकि इनकी मनोवृत्ति ही इस प्रकार की होती है, यह लोग समाज के लिये कोई स्वस्थ उदाहरण नहीं पेश
करते, दूसरे लोगों की समस्याओं का समाधान न निकालकर उसका किस प्रकार तमाशा बनाना है, यह इन लोगों को बखूबी आता है।
इस प्रकार के लोगों से हमें हमेशा दूरी ही बना
कर रखनी चाहिये, क्योंकि इन्हें किसी का भी
आगे बढ़ना नहीं सुहाता, तमाशबीन वे लोग
है, जो ऊपरी तौर पर तो आपसे सहानुभूति जताते हैं, मगर उनका अंदरूनी मनोभाव कुछ और ही होता है, वे केवल दूसरों की समस्या
का तमाशा बनाना ही जानते हैं, ऐसे लोग
परिवार, समाज, राजनीतिक पार्टी में आपको बहुधा मिल जाएंगे।
यह वे अवसरवादी लोग हैं, जो केवल तमाशा देखना जानते हैं, उसका हल निकालना नहीं, क्योंकि इन्हें संतुष्टि ही इस प्रकार के कार्य से मिलती है, दूसरे लोगों पर टिप्पणी करना, उनका उपहास उड़ाना, तमाशा बनाना, इन्हें इसमें बड़ा आनंद आता है, पर इस प्रकार के लोग परिवार, समाज के लिये
कोई अनुकरणीय उदाहरण नहीं प्रस्तुत करते,
अतः इस प्रकार के विचारधारा वाले लोगों से
हमें एक निश्चित दूरी बनाकर ही रखना चाहिये, वरना समय आने पर वे हमारा भी
उपहास ही उड़ाएंगे, इस प्रकार की मनोवृत्ति वाले लोगों से सदैव सतर्क करें, वह औरों को भी सतर्क करें।
विशेष:- तमाशबीन लोग वे हैं, जिन्हें लोगों की समस्याओं का तमाशा बनाने में बड़ा मजा आता है, वह किसी भी समस्या का समाधान तो नहीं प्रस्तुत करते, बल्कि उसे एक तमाशा बना देते हैं, सामाजिक नजरिये से ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही उचित है।
आपका अपना
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।