प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, लक्ष्मण रेखा पर, लक्ष्मण रेखा से मेरा तात्पर्य यह है,
हर व्यक्ति, हर पद की एक मर्यादा या लक्ष्मण रेखा होती है, वह पार नहीं होना चाहिये।
यह केवल प्राचीन काल में जैसा रामायण में घटनाक्रम आता है, लक्ष्मण जी सीता जी के लिये लक्ष्मण -रेखा का निर्माण करते हैं, पर मेरे विचार से यह लक्ष्मण रेखा समाज के हर वर्ग व हर व्यक्ति के लिए है, और जो उच्च पद पर हैं, उनके लिए इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि वे जैसा करेंगे, वैसा ही और लोग भी अनुसरण करेंगे, क्योंकि एक पुरानी कहावत भी है, "यथा राजा तथा प्रजा"
इसका यह अर्थ है जैसा राजा होगा, वैसे ही उसकी प्रजा होगी, यदि राजा स्वयं ही लक्ष्मण रेखा का ध्यान नहीं रखेंगे, उनकी मर्यादा का
उल्लंघन करेंगे, तो प्रजा से फिर वह कैसे उम्मीद रखते हैं, कि वह लक्ष्मण रेखा का पालन करेगी।
किसी भी कार्य को दूसरे से करवाने से पहले हमें स्वयं उस पर खरा उतरना पड़ता है, तभी हम दूसरों से भी उम्मीद रख सकते है
समाज में हर वर्ग की, हर पद की हर व्यक्ति की अपनी अपनी मर्यादा या लक्ष्मण रेखा है,
जो भी उसे पार करेगा, उसे उसका दंड भोगना ही होगा, यही अटल विधान है।
अतः हम सभी अपनी-अपनी मर्यादा व लक्ष्मण रेखा का पालन करें, तो जो समाज में इतनी अस्त -व्यस्त स्थिति का निर्माण हो रहा है, वह नहीं होगा, और समाज एक अच्छी स्थिति में खड़ा होगा।
विशेष:- अगर समाज में सभी अपनी-अपनी मर्यादा व लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखें, तो समाज में अपने आप एक सुखद स्थिति का निर्माण होगा, पर वर्तमान समय में हम सभी अपनी अपनी लक्ष्मण रेखा का अतिक्रमण करते नजर आ रहे हैं, और उसी का भुगतान
हमें करना पड़ रहा है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।