प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में मेरा विषय है, दिवंगत मशहूर शायर बशीर बद्र, उनकी शायरी की अपनी एक अलग पहचान है, जो जमीन से जुड़ी हुई शायरी की है, साधारण शब्दों में असाधारण बात कह देना, यह उनकी शायरी की विशेषता थी, उनका जाना उर्दू शायरी के लिये व साहित्य प्रेमियों के लिए एक ऐसा खालीपन है, जो कभी भरा नहीं जा सकता।
वे शायरी की महफिलों की शान हुआ करते थे, क्योंकि उनके द्वारा लिखी शायरी सीधे दिल को छूती थी, उन्होंने अपने द्वारा लिखी शायरी के द्वारा अवाम में एक मुकाम हासिल किया था, उनकी शायरी में जीवन की तल्खी को भी उन्हें बड़ी शिद्दत से कहा है, नाराजगी को भी किस प्रकार से शायरी में तब्दील करना, उनकी शायरी रूह को छूने वाली शायरी थी, सीधे व सरल शब्दों में
अपनी बात कहने की जो उनकी कला थी,
उसने उन्हें शायरी के जगत में एक विशिष्ट
स्थान दिया,
व्यक्ति आते हैं, चले जाते हैं, मगर कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो समाज पर अपनी गहरी छाप छोड़ जाते हैं, उन्हें में से एक नाम
है, शायर बशीर बद्र, वह भले ही शारीरिक रूप से चले गए हो, पर उनकी शायरी जनमानस हमेशा अपनी अमिट प्रभाव को कायम रखेगी, जनमानस क्या चाहता है, इस पर उनकी गहरी पकड़ थी, बड़े अदब से,
अपने शब्दों को संवारना व उन्हें अपनी कलम के जरिए लोगों तक पहुंचाना, उनकी शख्सियत हमेशा उनकी शायरी के जरिए
हमें प्रेरणा देती रहेगी।
साहित्यिक जगत के लिए यह एक दुःखद घटना है, जिसकी क्षतिपूर्ति कभी नहीं हो सकती, उन्हें दिल से सलाम।
विशेष:- शायर बशीर बद्र का इस प्रकार जाना जाना समाज व साहित्य प्रेमियों के लिये एक ऐसा खालीपन है, जो शायद भरा न जा सके,
अपनी शायरी के बलबूते जनमानस पर जो अमिट प्रभाव उन्होंने डाला, वहां सदियों तक याद रखा जाएगा।
आपका अपना
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।