प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में मेरा विषय है, नीट एग्जाम, यह परीक्षा रद्द की गई है, क्योंकि इसके पेपर लीक हुए, पर क्या इतने मात्र से सारी व्यवस्था सुधर जायेगी, इस भ्रष्टाचार की जड़ें बड़ी गहरी है, जब तक उन पर प्रहार नहीं किया जायेगा, तब तक इस प्रकार की घटनाएं होती रहेगी, अफसरों की मिली भगत के बगैर
यह संभव ही नहीं, उनकी पहचान की जाये, व उन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए तुरंत बर्खास्त किया जाए व आर्थिक रूप से भी दंडित किया जाये, केवल कुछ समय के लिए उन्हें अपनी जगह से हटा देना इसका इलाज नहीं,
जब तक दोषियों को चिन्हित करके उन्हें सख्त से सख्त सजा नहीं मिलती, व उनमें भय पैदा नहीं होता, आगे भी ऐसी घटनाएं होती रहेगी, अब थोड़ा विचार करें उन प्रतियोगियो पर, जो दिन रात अथक परिश्रम करके इन परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं,
परीक्षा हो जाने के बाद इस प्रकार से इसे रद्द कर देना प्रशासन की विफलता ही कही जायेगी , कितनी मुश्किलों से हर व्यक्ति मानसिक व आर्थिक दबावों को झेलते हुए
इन परीक्षाओं की तैयारी में लगा होता है,
सरकार की प्रशासनिक विफलता के कारण
यह स्थिति उत्पन्न हुई है, यह उन लाखों प्रतियोगियों के साथ कुठाराघात है, मानसिक रूप से फिर से इन परीक्षा की तैयारी करना
इतना आसान भी नहीं होता, प्रशासनिक विफलता का दंश इन प्रतियोगियों को झेलना पड़ रहा है, जब तक अधिकारियों पर, जो भी इनमें शामिल है, कड़ी से कड़ी कार्यवाही तुरंत नहीं की जाती, और कार्यवाही भी इतनी कड़ी होनी चाहिये, ताकि अगली बार कोई
ऐसा करने का दु:साहस न करें।
यह प्रतिभागियों के साथ उनके परिजनों के लिए भी एक कठिन समय है, किस प्रकार
उनके परिजन उनके लिए साधन जुटाते हैं, वे अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए भरसक प्रयास करते हैं, यह उनके लिए भी एक पीड़ा है, यह सब कुछ अचानक नहीं हो जाता है,
इन सबके लिए जो भी दोषी है, उन पर कड़ी कार्यवाही व वह अगली बार ऐसा ना हो, यह भी देखना बहुत जरूरी है।
निश्चित तौर पर प्रशासनिक विफलता तो है ही, हमारी सामाजिक व्यवस्था की विफलता भी है, ऐसे दोषी लोगों का समाज भी पूर्ण बहिष्कार करें, तभी इन लोगों को इसका एहसास होगा, जब सामाजिक रूप से बहिष्कार होगा, तब ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति में निश्चित ही कमी तो आएगी।
राज्य सरकार व केद्र सरकार दोनों को इस मामले में ऐसा कठोर कानून बनाना चाहिए,
जिससे दोषी लोग किसी प्रकार से छूट न सके उन्हें दंड मिले ही, प्रशासनिक व सामाजिक दोनों
तरफ से दो तरफा प्रहार जब ऐसे लोगों पर होगा, तभी हम व्यवस्था में परिवर्तन कर सकते हैं। अगली बार ऐसा कुछ ना हो, इस और भी ध्यान देना आवश्यक है।
विशेष:- यह केवल प्रशासनिक विफलता ही नहीं, हमारी सामाजिक विफलता भी है, इस प्रकार के प्रकरणों में में लिप्त अधिकारियों व अन्य लोगों का जब सामाजिक बहिष्कार पूर्ण रूप से होगा, तब लोग ऐसा करने का साहस ही नहीं करेंगे, प्रशासनिक स्तर पर
व सामाजिक स्तर पर दोनों जगह से ऐसे
लोगों को बहिष्कृत किया जाए, तभी तस्वीर बदलेगी।
आपका अपना
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।