प्रिय पाठक गण,
सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, पिछले कुछ समय से देश में चल रहे छात्र आंदोलन पर,
इस छात्र आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही, यह लगातार संचालित रहा, देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों की भारी भीड़ उमड़ी, सरकार द्वारा लंबे समय तक बात न करने पर भी छात्र आंदोलन
करने वालों के हौसले पस्त नहीं हुए, बल्कि संपूर्ण देश से उन्हें व उनके आंदोलन को समर्थन प्राप्त होने लगा, उनकी मुख्य मांगो में से एक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, व छात्रों पर जो विभिन्न मुकदमे दर्ज किए गए थे वे हटाना, व तीसरी प्रमुख मांग प्रभावित छात्रों को , जो नीट परीक्षा के दौरान परीक्षा रद्द होने से प्रभावित हुए, उन्हें मुआवजा प्रदान करना।
आखिर लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने उनकी तीनों मांगों को मंजूर किया, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी मंजूर हुआ, लेकिन क्या इन सबसे अगली बार पेपर लीक
नहीं होगा, दरअसल मुख्य समस्या प्रशासनिक लेबल पर है, वहां सबसे अधिक सुधार की जरूरत है, और यह देखने की जरूरत है की जो पेपर सेट किए जाते हैं, उस कमेटी में ऐसे लोग हो, जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ तो हो, पर वे लालच से रहित हो, उनका पूर्व का जीवन एक आदर्श शिक्षक का रहा हो, इस पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि अगर हम अच्छे लोगों को कमेटी रखेंगे, तो वे अपनी प्रतिष्ठा को प्रथम रखेंगे, व इस प्रकार पेपर लीक की घटनाएं नही होगी, और इस मामले में प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रशासन को चाहिए , वह ऐसे लोगों को सुरक्षा भी प्रदान करें, ताकि कोई उन्हें धमका कर या लालच देकर, जो पेपर सेट होता है, उस कमेटी में है, उनकी पूर्ण सुरक्षा का दायित्व प्रशासन का है, साथ ही प्रशासन की भूमिका यह भी होनी चाहिए कि ऐसे कमेटी मेंबरों को
उचित वेतन मिले, ताकि वह किसी भी लालच के वशीभूत न हो। पूरी प्रक्रिया में सुधार से ही
यह सब संभव है।
छात्रों को बहुत-बहुत बधाई, उन्होंने अपनी छात्र एकता को बनाए रखा, व आंदोलन को लगातार संचालित किया, जिसके फलस्वरुप उनकी मांगों को माना गया, मगर यह एक कदम है, संपूर्ण लक्ष्य अभी बाकी है, जब तक पेपर लीक का दाग,
फिर से पेपर लीक न हो, इसके लिए दबाव बनाए रखना, व प्रशासन को भी इस और
उचित कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।
विशेष:- छात्र आंदोलन से हमें यह देखने को मिला, कि आखिरकार छात्र एकता की जीत हुई है, पर संपूर्ण प्रकरण में, मूल जो बात है,
वह है पेपर लीक होना, अनुभवी व लालच से रहित जो शिक्षाविद है, उन्हें पेपर सेट करने वाली कमेटी में रखना चाहिये, उन्हें उचित पारिश्रमिक भी देना चाहिये, ताकि वे किसी लालच म ना आये, वह प्रशासन को संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करनी चाहिये।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।