प्रिय पाठक गण,
सागर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में मेरा विषय है, गरिमा, यह शब्द छोटा सा लगता है, पर इसकी बड़ी महिमा है,
कोई भी व्यक्ति स्वयं ही अपने कर्म द्वारा या तो अपनी गरिमा को स्थापित करता है यि खोता है, यह उसके द्वारा किए गए कर्मों पर ही निर्भर होता है, इसीलिए हम अपना जीवन जीते समय किस प्रकार गरिमा से अपने जीवन को जीते हैं, व औरों को भी इस प्रकार गरिमा से जीने के लिए प्रेरित करते हैं,
यूं तो हम सभी जीते हैं, पर गरिमा व आत्म सम्मान से जीने के लिये हमें अपने जो भी कार्य करते हैं, वह हम किस प्रकार सावधानी से करते हैं, कितनी ईमानदारी पूर्वक अपने कार्य को करते हैं, उसी से जीवन में हमारी गरिमा बढ़ती है, एक गरिमामय जीवन जीने के लिये हमें ईमानदारी, कठोर परिश्रम व अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण से कार्य करना चाहिये, इस प्रकार पूर्ण समर्पण से कार्य करने पर हमें जो परिणाम प्राप्त होंगे, वह हमारी गरिमा में तो वृद्धि करेंगे ही, परिवार व समाज में भी हमारी गरिमा में वृद्धि होगी, हमें अपने दायित्व पूर्ण समर्पण से निभाना चाहिये, स्वयं के प्रति, परिवार और समाज के प्रति हमारी जो भी जवाबदारियां है,
उन्हें पूर्ण आस्था व समर्पण से निभाने पर हमारी गरिमा में निश्चित ही वृद्धि होती है।
जिस परिवार , समाज में, राष्ट्र में हम रहते हैं, उसकी गरिमा के प्रति हमें सदैव सचेत रहना चाहिये, जीवन तो हम सभी को प्राप्त है, पर गरिमा से जीवन जीना, यह एक महत्वपूर्ण कला है, और हमें इसे सीखना चाहिये।
साथ ही और लोगों को भी समाज में गरिमा से जीवन जीने के लिये, जो भी हमसे सहयोग हो सकता है, वह हमें अवश्य करना चाहिये, क्योंकि हमारा नैतिक दायित्व भी है, समाज व राष्ट्र के प्रति।
एक अध्यापक की गरिमा, अपने शालीन
व्यवहार व ज्ञान के कारण होती है, जिस ज्ञान से वह समाज में एक स्वस्थ चेतना को जागृत करते है।
इसी प्रकार हर पद की अपनी गरिमा है,
जो भी जिस पद पर है, उसे उसकी गरिमा का पूर्ण ध्यान अवश्य रखना चाहिये, गरिमा शब्द हमें सुनने में बहुत छोटा प्रतीत होता है, मगर इसके मायने गंभीर है, जो इस शब्द की गहराई को समझ जाता है, वह अपने जीवन को तो सार्थक करता ही है, अन्य को भी सार्थक व गरिमा से जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है, एक इंसान की गरिमा उसकी इंसानियत से होती है, इसी प्रकार हर पद व पेशे की भी अपनी एक गरिमा होती है, उसे गरिमा को हर कीमत पर बनाए रखना चाहिये।
विशेष:- मनुष्य की गरिमा मनुष्यता में है, इसी प्रकार हर पद की भी अपनी गरिमा होती है, इसे पदस्थ व्यक्ति को बनाए रखना चाहिये,
इसी से एक स्वस्थ व सुंदर समाज का निर्माण हो सकता है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।