प्रिय पाठक गण,
सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम,
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे,  उम्मीद पर, 
उम्मीद यानी आशा, कुछ करने की, कुछ अच्छा होने की, सोचिए अगर उम्मीद ही न हो,
कि हमारा आने वाला कल आज से बेहतर होगा तो हमारे लिये फिर प्रेरणा का कार्य कौन करेगा।
जनता उम्मीद करती है नेता से, नेता उम्मीद करते हैं जनता से, माता-पिता उम्मीद करते हैं बच्चों से, बच्चे उम्मीद करते हैं अपने माता-पिता से, भक्त उम्मीद करते हैं भगवान से,
यानी सब कुछ परिदृश्य उम्मीद पर चल रहा है, तो उम्मीद ही है, जो हमारे सपनों में जान फूंकती है, हमारे प्रयासों को बल प्रदान करती 
है, अध्यापक को छात्रों से उम्मीद होती है, वहीं छात्रों को अध्यापक से, एक राष्ट्र को उम्मीद दूसरे राष्ट्र से, इस प्रकार संपूर्ण विश्व मैं सभी एक दूसरे से उम्मीद लगाए रहते हैं, और वह उम्मीद ही है, जो जीवन ऊर्जा हमें प्रदान करती रहती है, अगर जीवन में उम्मीद ना हो, 
तो फिर जीवन कैसा खाली हो जाएगा, बगैर किसी उम्मीद के हम किस दिशा में जाएंगे,
तो जीवन में उम्मीद का एक बहुत बड़ा योगदान है, वह हमारे सपनों को पुनर्जीवित करती है, उन्हें परवान चढ़ाती है , और इसी उम्मीद में हम भी कलम चलाते रहते हैं, कि किसी को हमारे विचार पढ़ने से कुछ नया प्राप्त होगा, तो इसी उम्मीद के साथ कि आप हमेशा हमारे लेख पढ़ते रहे , और अपनी उम्मीदों को जगाए रखें, उम्मीद है तो सब कुछ है।
विशेष:- हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ विशेष करने की उम्मीद होती है, और यही उम्मीद से ताकत प्रदान करती है, जीवन में कुछ हासिल करने की, तो उम्मीद से भरपूर रहे, और उम्मीद रखें हमारा भी दिन आएगा। 
आपका अपना 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद


प्रिय पाठक गण,
   सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
  आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, निर्धारण शब्द पर, यह शब्द लगता तो छोटा सा है, 
मगर इसके मायने गंभीर है।
       आज हमारा जो जीवन है,  वह किस प्रकार संचालित होगा, यह निर्धारण क्या हम स्वयं अपने विवेक से करते हैं, यह समाज, 
पुरानी परिपाटी या  विवशता, आर्थिक दबाव , कौन यह निर्धारण करेगा, हमारा जीवन किस दिशा में जाये, आज जो सामाजिक स्थिति है, इसमें हमारे सामने 
आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक परिपाटी को चलाना, स्वयं की उन्नति पर ध्यान देना,
कड़ी प्रतिस्पर्धा, हमारे ऊंचे सपने, समाज का बदलता परिवेश, निरंतर बदलते मूल्य, ऐसे बहुत सारे कारण है, जो हमारे जीवन के
संचालन में , उसका स्वरूप कैसा होगा,
यह निर्धारण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम इनमें से किसी भी एक कारण को मुख्य नहीं मान सकते, हर एक कारण की 
अपना एक महत्व है, जो निर्धारण में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है, पिछले कुछ समय से समाज में आर्थिक आधार को एक महत्वपूर्ण कारक जरूर माना जा सकता है,
जो हमारे जीवन, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक मूल्यों व व समाज में हमारे स्थान
का निर्धारण करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण 
कारक के रूप में सामने आता है, आज समाज में आर्थिक पहलू सबसे पहले देखा जाता है, वह उसके सामाजिक स्तर के निर्धारण का सबसे बड़ा पैमाना है।
       इस प्रकार हम देखते हैं, हमारा जीवन
केवल हम तय नहीं कर सकते, उसमें कई महत्वपूर्ण कारण ऐसे हैं, जो इस बात को निर्धारित करने में अपनी अपनी भूमिका 
निभाते हैं, और समाज में हमारी भूमिका 
हम किस प्रकार से बुद्धिमता पूर्वक अपने आप को स्थापित करते हैं, किस प्रकार 
संघर्ष करते हैं,  समाज में हमारी क्या भूमिका होगी, किस प्रकार का हमारा कद होगा, इसका निर्धारण होता है।
        आज संपूर्ण विश्व एक दूसरे के सहयोग से संचालित है, तकनीकी व आर्थिक सहयोग 
के लिए परस्पर एक दूसरे पर निर्भर है, इस प्रकार संपूर्ण विश्व मैं जो भी आर्थिक, राजनीतिक गतिविधियां है, वह एक दूसरे के 
परस्पर सहयोग पर निर्भर है, विश्व में कोई
एक देश एक तरफा फैसला नहीं कर सकता, 
क्योंकि वह संपूर्ण विश्व से जुड़ा है, अतः इसका निर्धारण करने में विश्व  के समस्त देशो का
सहयोग व समर्थन भी चाहिये।
      इस प्रकार हम पाते हैं निर्धारण जो भी होता है, चाहे वह परिवार में हो, व्यक्तिगत जीवन में हो, देश में हो, विश्व में हो, परस्पर सहयोग की भूमिका सबसे अधिक है, जितना अच्छा समन्वय होगा, उतने बेहतर परिणाम होंगे। 
विशेष:- हमें जीवन में अपनी भूमिका का निर्धारण बहुत सोच समझ कर करना चाहिये,
क्योंकि इस पर हमारी उन्नति किस प्रकार होगी, यह तय होता है, बगैर किसी दबाव के 
स्वतंत्र रूप से हम यह निर्णय करें या निर्धारित करें , हमें किस भूमिका का निर्वाह करना है।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

प्रिया पाठक गण,
   सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
  आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, सुविधा पर, 
आज का मनुष्य सुविधा भोगी बन चुका है, 
अत्यधिक सुविधा के कारण वह आलसी बनता जा रहा है, और श्रम से दूर रहने के कारण उसका स्वास्थ्य भी  बिगड़ता जा रहा है।
जीवन में मनुष्य की मूलभूत सुविधा रोटी, कपड़ा और मकान है, पर आज हमारे देश में
कई लोग  मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है, वहीं दूसरी और ऐसा वर्ग भी है, जो विलासिता की सुविधाओं से  परिपूर्ण है,
इनके पास आलीशान जीवन जीने की सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
        आज एक तरफ देश में कई लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है, जो की एक सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है,
स्वास्थ्य संबंधी, शिक्षा संबंधी सुविधा उपलब्ध कराना हर सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र  में सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय है, व सरकारी अस्पतालों की भी स्थिति कुछ अधिक अच्छी नहीं कही जा सकती, जबकि यह मूलभूत आवश्यकता व सुविधाओं में से एक है।
      एक और बात विचारणीय है, हमें जितनी अधिक सुविधा प्राप्त होती है, उतने ही हम और सुविधाओं की उम्मीद लगा बैठते हैं,
आज विज्ञान के कारण हम  कई ऐसी सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना ही नहीं की थी, इसका सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण मोबाइल है, हम आज मोबाइल से पूरी दुनिया से वार्तालाप व संपर्क कर सकते हैं, कोई सी भी जानकारी हम मोबाइल के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं, किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन भी हम
मोबाइल से कर सकते हैं, हम सूचना का आदान-प्रदान कर सकते हैं, क्या  कुछ वर्षों पहले यह संभव था, यह वैज्ञानिक क्रांति के कारण संभव हुआ। 
विशेष:- अत्यधिक सुविधा हमें निष्क्रिय कर देती है, हमें उतनी ही सुविधाओं को उपभोग करना चाहिए, जितनी हमारे लिए आवश्यक है, वरना स्वास्थ्य संबंधी समस्या हमें हो सकती है, अत्यधिक सुविधा जुटाने के फिर में हम कर्ज का शिकार हो सकते है।
आपका अपना,
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
  आज हम प्रवाह में चर्चा करेंगे, छल पर,
छल, यानी किसी से कपट पूर्ण व्यवहार, 
किसी को धोखा देना, किसी को भी छलना
या धोखा देना मानवीय गरिमा की दृष्टि से भी उचित नहीं, मगर आज समाज में चारों और 
छल का ही वातावरण है, व्यक्ति सच बोलना ही नहीं चाहता, वह छल से सब कुछ प्राप्त करना चाहता है, जबकि छल से प्राप्त की हुई कोई भी वस्तु, धन या पद अधिक देर तक कायम नहीं रहते, वे उसके हाथ से चले जाते हैं। कभी-कभी तो मनुष्य अपने आप से छल कर बैठता है, वह अपने आप को झूठा दिलासा प्रदान करता है, आगे बढ़ाने के 
 गलत रास्ते चुन लेता है, व पतन के मार्ग की
और चला जाता है, इस प्रकार वह अपने आप से ही छल करता है।
     छली व्यक्ति भले कुछ समय के लिए अपने आप को छल से आगे कर ले, मगर अंततः वह पराजित होता ही है, जब कोई हमें छले तो हमें कैसा लगेगा?   इसीलिए हमें जीवन में छल का प्रयोग नहीं करना चाहिए,
वरना उसका अंतिम परिणाम हमेशा दुखदायी होगा, जो भी हो स्पष्ट कहें, क्योंकि आखिरकार छल पकड़ा ही जाता है, और छली व कपटी व्यक्ति का कोई भी विश्वास नहीं करता, छल हमें अपनी अंतरात्मा में भी 
नैतिक रूप से पतन की ओर ले जाता है।
आप अगर इतिहास में भी देखें, तो छली व्यक्ति अधिकांश परास्त ही हुए हैं, उनका अंतिम हश्र हमेशा दुखद हुआ है, फिर हम क्यों न छल से दूर रहे ।
विशेष:- छल का परिणाम हमेशा ही बुरा होता है, इसलिए किसी को भी न छले, छल का अंतिम परिणाम हमेशा दुखदायी होता है वह हमें नैतिक पतन की और ले जाता है, इससे हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है।
अतः जीवन में छल से दूर रहे।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।
प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, यात्रा पर, 
यह शब्द सुनने में तो बड़ा छोटा लगता है,
मगर इसके कई मायने हैं, हम सभी का जीवन एक अनूठी यात्रा ही तो है, अपने संपूर्ण जीवन में हम निरंतर एक यात्रा ही तो कर रहे हैं, यात्रा हमारे अपने भीतर की भी हो सकती है, 
जिसे हम आंतरिक यात्रा कह सकते हैं। 
       मनुष्य अपने अनुभव को बढ़ाने के लिए,
जिज्ञासा के कारण अलग-अलग देशों की यात्रा करते हैं, वहां के परिवेश से व संस्कृति से रूबरू होते हैं। हमारी सबकी अपनी-अपनी यात्रा है, और सबके अपने-अपने अनुभव है। 
अपने जिज्ञासु स्वभाव के कारण मनुष्य शुरू से ही यात्रा करता रहा है, ऐसे जिज्ञासु स्वभाव के  कारण मनुष्य ने अंतरिक्ष यात्रा भी कर ली है, यात्रा कई प्रकार की है, धार्मिक यात्रा, आंतरिक यात्रा, अंतरिक्ष यात्रा, व विभिन्न खेल, जो खिलाड़ी खेलते हैं, उनके संबंध में एक देश से दूसरे देश में यात्रा, रेल यात्रा, बस यात्रा, जल यात्रा ऐसे विभिन्न स्वरूप यात्रा के हैं, यानी हमारे जीवन का हर पहलू किसी न किसी यात्रा से अनिवार्य रूप से जुड़ा हुआ है, विभिन्न यात्राएं हमें विभिन्न दृष्टिकोण प्रदान करती है, जीवन के नए आयामों से परिचय कराती है, तो  हम जीवन के विभिन्न यात्रा -पडावो से गुजरे 
व जीवन का आनंद उठाएं। 
    हर यात्रा हमें कुछ सिखाती है, उससे सीखे,
नित्य नूतन यात्रा करते रहे, हमारे जीवन में एक आध्यात्मिक यात्रा भी होती है, जो मैं आंतरिक रहस्यो से परिचय कराती है।
    कुल मिलाकर मेरे कहने का तात्पर्य है, हम अपने जीवन में विभिन्न यात्रा पड़ावों से गुजरते हैं, उनसे सीखे, यात्राओं का आनंद लें।
विशेष:- हम सभी का जीवन विभिन्न यात्राओं का एक समावेश है, हमें विभिन्न यात्राओं से 
जीवन में गुजरना ही होता है, यात्राओं का आनंद ले, उनसे सीखे। यात्रा करते रहे।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।
प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, प्रतिकूलता पर, जीवन में हर समय अनुकूलता ही हो, यह संभव नहीं, लेकिन प्रतिकूलता हमें जीवन में अधिक सिखाती है, अनुकूल स्थिति में तो हर कोई अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है, मगर जब स्थितियां  प्रतिकूल हो, तब संघर्ष अधिक बढ़ जाता है, लेकिन वही संघर्ष हमें और अधिक निखारता भी है, इसलिए जीवन में 
प्रतिकूलताओं का स्वागत करें, वे आपके जीवन में आती ही इसलिए है, ताकि आप उनसे संघर्ष कर अपने आप को और निखार  सके, उदाहरण के तौर पर हम किसी खेल का उदाहरण  लेते हैं, जो खिलाड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता
है, उसकी ही जय- जयकार   होती है।
         जो व्यक्ति अपने जीवन में जितनी प्रति कूल स्थितियों का सामना करता है, उसके जीवन में अधिक संघर्ष के कारण सफलताएं भी और अधिक हासिल होती है, और प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष के कारण 
आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
      इतिहास गवाह है, जो भी प्रतिकूलताओं से घबराते नहीं, वही अपने जीवन में इतिहास रचते हैं, जितनी अधिक प्रतिकूल स्थितियों का सामना हम करेंगे, उतना ही संघर्ष भी बढ़ेगा, 
और संघर्ष बढ़ने के कारण हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ेगा, प्रतिकूल परिस्थितियों हमारा  व्यक्तित्व गढ़ने आती है, इसलिए 
प्रतिकूल परिस्थितियों का स्वागत करें व
जीवन में उपलब्धियो के लिए तैयार रहें।
       अनुकूल परिस्थितियों में तो हर कोई लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों होने पर भी हारता नहीं, दुनिया 
उसी की जयकार करती है, आप पाएंगे 
जो भी व्यक्ति अपने जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों से जितना अधिक गुजरा है,
उसके हिस्से में सफलताएं भी उतनी ही अधिक होती है। हम क्रिकेट का उदाहरण लेते
है, जब सब बल्लेबाज कम रन बनाते हैं, तब प्रतिकूल परिस्थितियों में जो बल्लेबाज अच्छे रन बनाता है, उसी की वाहवाही होती है।
और वह धीरे-धीरे प्रतिकूल परिस्थितियों में रन बनाने  के कारण सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज के रूप में स्थापित होता जाता है। ऐसा ही हमारा जीवन भी है, जितनी प्रतिकूलताओं का हम सामना करेंगे, उतनी ही सर्वश्रेष्ठ हमारी उपलब्धियां भी होगी।
विशेष:- प्रतिकूलता हमें जीवन में सिखाने के लिए आती है, इसलिए उनका हृदय से स्वागत करें, क्योंकि आपके जीवन में निखार लाने के लिए आई है, जितनी अधिक प्रतिकूल परिस्थितियों होगी, संघर्ष भी उतना ही होगा 
और उपलब्धियां भी फिर वैसी ही होगी।
आपका अपना 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
     सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
  आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगें, भ्रष्टाचार पर, 
हमारे देश में कई सरकारों ने कार्य किया, 
नगर भ्रष्टाचार पर कोई भी सरकार लगाम नहीं लगा सकी, इसका सबसे बड़ा कारण यह है, भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार का रूप ले चुका
है, आप किसी भी सरकारी विभाग में कोई कार्य नियम से करने के लिए जायेंगे, तो भी वहां पर नियम से कार्य होना मुश्किल ही है, 
क्योंकि वहां बीच के लोग जो बैठे हैं, जो इस भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं, उनकी सहायता लिए बगैर हम अपना कोई कार्य करा ही नहीं सकते, सब कुछ नियम पूर्वक होने पर भी
आपको भ्रष्टाचार रूपी देवता पर चढ़ावा तो चढ़ाना हीं पड़ता है।
     विश्व के 180 देशों में भ्रष्टाचार की जो सूची हैं, उसमें भारत का स्थान अभी भी 
96  वे स्थान पर है, आजादी के इतने वर्षों बाद भी भ्रष्टाचार ने देश को भीतर से जर्जर कर रखा है, इसके लिए हम सभी सामूहिक रूप से जवाबदार है, जब तक हम स्वयं इन बातों से समझौता करते रहेंगे, बदलाव संभव नहीं है, जनता जनार्दन ही अगर चाहे तो भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है, किसी भी प्रकार
के भ्रष्टाचार से समझौता न करें, ऐसा प्रण  सभी नागरिक ले ले, तब ही स्थिति में बदलाव आ सकता है, आईये, आज हम यह प्रण करें, 
ना तो स्वयं भ्रष्टाचार करेंगे, ऐसे लोगों का सहयोग करेंगे, अगर यह सब के भीतर भाव जाग उठे, वह ईमानदारी पूर्वक इस पर अमल
हो, तो अब भी तस्वीर बदल सकती है, अगर जनता अपनी पूर्ण इच्छा शक्ति से इस पर अमल करें, तभी यह संभव है। दिन पर दिन नहीं तो भ्रष्टाचार बढ़ता रहेगा, वह हम केवल देखते रहेंगे, जब तक हम आगे बढ़कर इसका मुकाबला नहीं करते, इसे हटाना संभव नहीं।
विशेष:-   जिस देश में भी भ्रष्टाचार होता है, देश भीतर से कमजोर हो जाता है, हमारे अपने देश के प्रति भी नैतिक जवाबदारी है,
वह हमें सचेत रहकर भ्रष्टाचार से मुकाबला
करना होगा, वरना भीतर ही भीतर भ्रष्टाचार 
दीमक की भांति इस देश को खोखला कर देगा , हम सभी का कर्तव्य है, हम जागे, जन जागरण के बिना इसका सफाया होना संभव नहीं। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।