प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगें, एकाग्रता पर, 
सुनने में व कहने में तो यह छोटा सा शब्द लगता है, मगर जब हम किसी भी विषय पर एकाग्र होते हैं, एक की दिशा की और चलते हैं, वह भी अपनी संपूर्ण एकाग्रता के साथ,
तो हमें आश्चर्यजनक परिणाम देखने को प्राप्त होते हैं। जब हम किसी एक विषय पर अपनी  संपूर्ण एकाग्रता के साथ कार्य करते हैं , तो हमें उसी एकाग्रता के कारण जो परिणाम प्राप्त होता है, वह अन्य लोगों की तुलना में कहीं बेहतर होता है, आप जितनी एकाग्रता से किसी भी विषय पर कार्य करेंगे, चाहे वह आपकी पढ़ाई हो, व्यापार हो, आपकी कोई अभिरुचि हो, कला या साहित्य का विषय हो,
जितनी एकाग्रतापूर्वक आप कार्य करेंगे,
उतने ही शानदार परिणाम  प्राप्त होंगे,
एक ही प्रतियोगिता में कई खिलाड़ी भाग लेते हैं,  परंतु जो संपूर्ण एकाग्रतापूर्वक अपने संपूर्ण कौशल को उस समय प्रदर्शित करता है, एकाग्रतापूर्वक उस समय प्रदर्शन करता है,
उसके परिणाम अन्य लोगों से कहीं बेहतर होते हैं। 
        आपकी कोई कला जिसका आप
एकाग्रता पूर्वक  अभ्यास करते हैं, निरंतरता 
रखते हैं, तो आप अपने निरंतर अभ्यास व
एकाग्रता के कारण उस कला में निपुण हो 
सकते हैं, व शीर्ष स्थान भी प्राप्त कर सकते हैं। दरअसल सारा खेल आपकी एकाग्रता का है। 
विशेष:- जितनी एकाग्रता से आप अपना कोई भी कार्य करेंगे, उसमें सफलता की संभावनाएं उतनी ही अधिक होगी, कोई भी कला या खेल, अगर आप शीर्ष स्थान हासिल करना 
चाहते हैं, तो निरंतर एकाग्रता पूर्वक आपको 
अपने प्रयास जारी रखना होंगे।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन,
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगें, एकाग्रता पर, 
सुनने में व कहने में तो यह छोटा सा शब्द लगता है, मगर जब हम किसी भी विषय पर एकाग्र होते हैं, एक की दिशा की और चलते हैं, वह भी अपनी संपूर्ण एकाग्रता के साथ,
तो हमें आश्चर्यजनक परिणाम देखने को प्राप्त होते हैं। जब हम किसी एक विषय पर अपनी  संपूर्ण एकाग्रता के साथ कार्य करते हैं , तो हमें उसी एकाग्रता के कारण जो परिणाम प्राप्त होता है, वह अन्य लोगों की तुलना में कहीं बेहतर होता है, आप जितनी एकाग्रता से किसी भी विषय पर कार्य करेंगे, चाहे वह आपकी पढ़ाई हो, व्यापार हो, आपकी कोई अभिरुचि हो, कला या साहित्य का विषय हो,
जितनी एकाग्रतापूर्वक आप कार्य करेंगे,
उतने ही शानदार परिणाम  प्राप्त होंगे,
एक ही प्रतियोगिता में कई खिलाड़ी भाग लेते हैं,  परंतु जो संपूर्ण एकाग्रतापूर्वक अपने संपूर्ण कौशल को उस समय प्रदर्शित करता है, एकाग्रतापूर्वक उस समय प्रदर्शन करता है,
उसके परिणाम अन्य लोगों से कहीं बेहतर होते हैं। 
        आपकी कोई कला जिसका आप
एकाग्रता पूर्वक  अभ्यास करते हैं, निरंतरता 
रखते हैं, तो आप अपने निरंतर अभ्यास व
एकाग्रता के कारण उस कला में निपुण हो 
सकते हैं, व शीर्ष स्थान भी प्राप्त कर सकते हैं। दरअसल सारा खेल आपकी एकाग्रता का है। 
विशेष:- जितनी एकाग्रता से आप अपना कोई भी कार्य करेंगे, उसमें सफलता की संभावनाएं उतनी ही अधिक होगी, कोई भी कला या खेल, अगर आप शीर्ष स्थान हासिल करना 
चाहते हैं, तो निरंतर एकाग्रता पूर्वक आपको 
अपने प्रयास जारी रखना होंगे।
आपका अपना,
सुनील शर्मा,
जय भारत,
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
   सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
 आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, पिछले कुछ समय से देश में चल रहे छात्र आंदोलन पर,
इस छात्र आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही, यह लगातार संचालित रहा, देश के विभिन्न हिस्सों  से दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों की भारी भीड़ उमड़ी, सरकार द्वारा लंबे समय तक बात न करने पर भी छात्र आंदोलन
करने वालों के हौसले पस्त नहीं हुए, बल्कि संपूर्ण देश से उन्हें व उनके आंदोलन को समर्थन प्राप्त होने लगा, उनकी मुख्य मांगो में से एक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, व छात्रों पर जो विभिन्न मुकदमे दर्ज किए गए थे वे हटाना, व तीसरी प्रमुख मांग प्रभावित छात्रों को , जो नीट परीक्षा के दौरान परीक्षा रद्द होने से प्रभावित हुए, उन्हें मुआवजा प्रदान करना। 
      आखिर लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने उनकी तीनों मांगों को मंजूर किया, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी मंजूर हुआ, लेकिन क्या इन सबसे अगली बार पेपर लीक 
नहीं होगा, दरअसल मुख्य समस्या प्रशासनिक लेबल पर है, वहां सबसे अधिक सुधार की जरूरत है, और यह देखने की जरूरत है की जो पेपर सेट किए जाते हैं, उस कमेटी में ऐसे लोग हो, जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ तो हो, पर वे लालच से रहित हो, उनका पूर्व का जीवन एक आदर्श शिक्षक का रहा हो, इस पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि अगर हम अच्छे लोगों को कमेटी रखेंगे, तो वे अपनी प्रतिष्ठा को प्रथम रखेंगे, व इस प्रकार पेपर लीक की घटनाएं नही होगी, और इस मामले में प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रशासन को चाहिए , वह ऐसे लोगों को सुरक्षा भी प्रदान करें, ताकि कोई उन्हें धमका कर या लालच देकर, जो पेपर सेट होता है, उस कमेटी में है, उनकी पूर्ण सुरक्षा का दायित्व प्रशासन का है, साथ ही प्रशासन की भूमिका यह भी होनी चाहिए कि ऐसे कमेटी मेंबरों को 
उचित वेतन मिले, ताकि वह किसी भी लालच के वशीभूत न हो। पूरी प्रक्रिया में सुधार से ही
यह सब संभव है।
       छात्रों को बहुत-बहुत बधाई, उन्होंने अपनी छात्र एकता को बनाए रखा, व आंदोलन को लगातार संचालित किया, जिसके फलस्वरुप उनकी मांगों को माना गया, मगर यह एक कदम है, संपूर्ण लक्ष्य अभी बाकी है, जब तक पेपर लीक का दाग, 
फिर से पेपर लीक न हो, इसके लिए दबाव बनाए रखना, व प्रशासन को भी  इस और 
उचित कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। 
विशेष:- छात्र आंदोलन से हमें यह देखने को मिला, कि आखिरकार छात्र एकता  की जीत हुई है, पर संपूर्ण प्रकरण में, मूल जो बात है, 
वह  है पेपर लीक होना, अनुभवी व लालच से रहित जो शिक्षाविद है, उन्हें पेपर सेट करने वाली कमेटी में रखना चाहिये, उन्हें उचित पारिश्रमिक भी देना चाहिये, ताकि वे किसी लालच म ना आये, वह प्रशासन को संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करनी चाहिये।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
    सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
आशा है आप सभी को मेरा यह ब्लॉग पसंद आ रहा होगा, मैंने अपनी ओर से संपूर्ण कोशिश की है, कि मैं विविध विषयों का इसमें समावेश कर सकूं, कहां तक सफल रहा, यह तो आप पर निर्भर है, आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे , प्रतिफल पर, हम जीवन में जो कुछ भी करते हैं, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, हमें हमारे कर्म का प्रतिफल अवश्य मिलता है, तो हम किस प्रकार के कर्म करें, ताकि उन कर्मों को करने का जो प्रतिफल हमें प्राप्त हो, वह सुखद हो, इसके लिए हमारे कर्मों का चयन इस प्रकार होना चाहिए, हम जो भी कर्म करें,
उससे हमें लाभ अवश्य हो, मगर उससे किसी की हानि न हो, हम एक संतुलन के रूप में
हमारे प्रत्येक कर्म को करें, ताकि जो भी प्रतिफल हो, वह अच्छा हो, साथ ही हम हमारे साथ-साथ समाज के लिए भी कुछ ऐसा कार्य अवश्य करें, जिससे समाज को लाभ पहुंचे, 
अगर समाज आपसे लाभान्वित होता है, तो समाज की सकारात्मक ऊर्जा आपकी और 
प्रतिफल के रूप में आपको प्राप्त होंगी।
     हमें हमारा कर्म तो अच्छी दिशा मैं रखना ही है, साथ ही जो लोग हमसे जुड़ें है, वे चाहे परिवार के हो या समाज की, उन्हें भी अच्छी दिशा में प्रेरित करना, यह भी एक पुण्य का कार्य है, क्योंकि जब अधिकतम सकारात्मक ऊर्जा एक साथ सही दिशा की ओर जाएगी, 
तो उसका प्रतिफल भी उतना ही उत्तम हमें प्राप्त  होगा।
विशेष:- हम कर्म करते समय यह सावधानी अवश्य रखें, कि हम जो भी कर्म कर रहे हैं,
उससे हमें लाभ हो, मगर किसी को हानि न हो, एक संतुलित दृष्टिकोण से हम अपना कर्म करें, तो फिर उसका अच्छा प्रतिफल ही हमें प्राप्त होगा। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
   सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
    आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, लक्ष्मण रेखा पर, लक्ष्मण रेखा से मेरा तात्पर्य यह है, 
हर व्यक्ति, हर पद की एक मर्यादा या लक्ष्मण रेखा होती है, वह पार नहीं होना चाहिये।
      यह केवल प्राचीन काल में जैसा रामायण में घटनाक्रम आता है, लक्ष्मण जी सीता जी के लिये लक्ष्मण -रेखा का निर्माण करते हैं, पर मेरे विचार से यह लक्ष्मण रेखा समाज के हर वर्ग व हर व्यक्ति के लिए है, और जो उच्च पद पर हैं, उनके लिए इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि वे जैसा  करेंगे, वैसा ही और लोग भी  अनुसरण करेंगे, क्योंकि एक पुरानी कहावत भी है, "यथा राजा तथा प्रजा"
इसका यह अर्थ है जैसा राजा होगा, वैसे ही उसकी प्रजा होगी, यदि राजा स्वयं ही लक्ष्मण रेखा का ध्यान नहीं रखेंगे, उनकी मर्यादा का
उल्लंघन करेंगे, तो प्रजा से फिर वह कैसे उम्मीद रखते हैं, कि वह लक्ष्मण रेखा का पालन करेगी। 
            किसी भी कार्य को दूसरे से करवाने से पहले हमें स्वयं उस पर खरा उतरना पड़ता है, तभी हम दूसरों से भी उम्मीद रख सकते है 
समाज में हर वर्ग की, हर पद की हर व्यक्ति की अपनी अपनी मर्यादा या लक्ष्मण रेखा है, 
जो भी उसे पार करेगा, उसे उसका दंड भोगना ही होगा, यही अटल विधान है। 
     अतः हम सभी अपनी-अपनी मर्यादा व लक्ष्मण रेखा का पालन करें, तो जो समाज में इतनी अस्त -व्यस्त स्थिति का निर्माण हो रहा है, वह नहीं होगा, और समाज एक अच्छी स्थिति में  खड़ा होगा।
विशेष:-   अगर समाज में सभी अपनी-अपनी मर्यादा व लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखें, तो समाज में अपने आप एक सुखद स्थिति का निर्माण होगा, पर वर्तमान समय में हम सभी अपनी अपनी लक्ष्मण रेखा का अतिक्रमण करते नजर आ रहे हैं, और उसी का भुगतान 
हमें करना पड़ रहा है।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।
प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम, 
   मुझे पूर्ण उम्मीद है, विभिन्न विषयों पर किया गया यह वार्तालाप आपको पसंद आ रहा होगा, इसी श्रृंखला में हम चर्चा करेंगे,
आकर्षण शब्द पर, मनुष्य का स्वाभाविक रूप से प्रकृति के प्रति आकर्षण रहा है, तभी आप पाएंगे कि जितने भी मंदिर या सिद्ध स्थल हमें देखने को मिलेंगे, वह प्रकृति के अत्यंत निकट देखने को मिलेंगे, सौंदर्य के प्रति भी मनुष्य का आकर्षण शुरुआत से ही रहा है भगवान के मंदिर भी इसीलिए आकर्षक स्वरूप में बनाए जाते हैं, ताकि वहां हमारा मन रम सके, इसके अलावा मनुष्य का आकर्षण उन चीजों के प्रति अधिक होता है, 
जिनसे वह अनभिज्ञ होता है, या जिन्हें  वह नहीं जानता है।
        विभिन्न कलाओं व संगीत के प्रति भी
आकर्षण मनुष्य का  स्वाभाविक रूप से रहा है, जो हमें पुराने मंदिर व इमारतों के निर्माण में हमें देखने को प्राप्त होता है।
      इसी प्रकार आज के समय में एक और आकर्षक है, वह है सत्ता  का आकर्षण,
आज हर व्यक्ति सत्ता से जुड़ा रहना चाहता है, उसका आकर्षण उसे खींचता है।
     इसके अलावा खेल व सिनेमा भी मनुष्य के आकर्षण के केंद्र रहे हैं, विभिन्न खेल गतिविधियां ,जो संचालित हो रही है, वह इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। ऐसे ही विभिन्न 
वस्तुओं, खेलों व ऐसी कोई चीज, जिज्ञासा, 
जो कुछ नया हमारे सामने लाती है, उसके प्रति भी हमारा आकर्षण स्वाभाविक रूप से होता है। 
विशेष:- मनुष्य का आकर्षण कला, विज्ञान, 
प्रकृति के सहज सौंदर्य की और शुरुआत से ही रहा है, और वे विभिन्न विषय, जो कोई नई जानकारी उपलब्ध कराते हैं, उनके प्रति भी 
हमारा स्वाभाविक आकर्षण होता है। 
          आकर्षक एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, 
और यह मनुष्य मात्र में घटित होती है। 
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।

प्रिय पाठक गण,
  सादर नमन, 
आप सभी को मंगल प्रणाम,
    आज प्रवाह में हम चर्चा करेंगे, उत्तरदायित्व पर, आज सभी और जो सबसे बड़ी खामी हमें देखने को मिलती है, वह है अपने उत्तरदायित्व से हर व्यक्ति, जो उस उत्तरदायित्व को निभाता हैं, जो उसे दिया गया है, उसका वह सही ढंग से निर्वाह नहीं करता, और इसका परिणाम यह होता है, कि हमें जो अपेक्षित परिणाम प्राप्त होना चाहिये, वह नहीं प्राप्त होते। 
   सोचिए ,अगर एक भी दिन प्रकृति अपने मूल उत्तरदायित्व का निर्वहन करने से इनकार कर दे, तो त्राहि-त्राहि मच जाएगी, फिर उसी प्रकृति से निर्मित हम अपने उत्तरदायित्व को क्यों नहीं निभाते। 
      अगर समाज में हर व्यक्ति, हर वर्ग अपने अपने उत्तरदायित्व का सही ढंग से निर्वाह करें, तो कई समस्याएं खड़ी ही नहीं होगी। 
आज देश में हम शिक्षा के क्षेत्र को ही देखें, 
अगर वह व्यवस्था सुचारू रूप से चलती, उसको चलाने वाले अपने उत्तरदायित्व का सही निर्वहन करते, तो जो यह देश में अभी 
शिक्षा के संबंध में जो एक गिरावट देखने को मिली है, परीक्षा के पेपर के पेपर लीक हो रहे हैं, किसी को अपने उत्तरदायित्व का भान ही नहीं, सभी व्यक्ति अपने अपने मूल उत्तरदायित्व से भागना चाहते हैं, और उसका खामियाजा सारे समाज को भुगतना पड़ता है, 
नेता अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं करते, और खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है, इसी प्रकार हम किसी भी वर्ग को 
ले, जैसे व्यापारी अगर अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन सही ढंग से नहीं करते, तो खामियाजा ग्राहक को भुगतना पड़ता है। अगर समाज के सभी वर्ग अध्यापक, इंजीनियर, राजनेता, शिक्षक, व्यापारी, डॉक्टर  व अन्य जो भी वर्ग है, वह सभी अपना अपना उत्तरदायित्व अगर संपूर्ण ईमानदारी से निभाए, तो संपूर्ण समाज उन्नति की ओर अग्रसर होगा।
विशेष:- कोई भी समाज तब  उन्नति की और अग्रसर तभी होता है, जब  समाज  में अपने कर्तव्य  के प्रति उत्तरदायी लोग अपने उत्तरदायित्व का सही ढंग से निर्वहन करते हैं।
आपका अपना, 
सुनील शर्मा, 
जय भारत, 
जय हिंद।